अनमोल सुक्तिकोश-6

सहानुभूति सहृदयता की निशानी है।
-अज्ञात
डुबने वाले के प्रति सहानुभूति का मतलब उसके साथ डूबना नहीं है बलिक खुद तैरकर उसको बचाने का प्रयत्न करना है।
-अचार्य विनोवा भावे
यदि सुंदर दिखाई देना है, तो तुम्हें भड़कीले कपड़े नहीं पहनने चाहिए बल्कि अपने गुणों को बढ़ाना चाहिए।
-महात्मा गांधी



यदि हम चाहते हो कि हमें कोई ऐसा चस्का लगे तो प्रत्येक दशा मे हमारा सहारा हो और जो जीवन में हमें आनंद और प्रसन्नता प्रदान कर करे, उस की बुराईयों से हमें बचाए-चाहे हमारे दिन कितने ही बुरे हों और सारा संसार हम से रूठा हो-हमें चाहिए कि हम पढ़ने का चस्का लगाएं।
-राम चंद्र शुक्ल
ज्ञानी वह है जो जगत् का यथार्थ रूप जाने।
-संत ज्ञानेश्वर
सुखी है वह, जो इस संसार को एक स्वर्गीय उपवन में परिणत कर देता है।
-स्वाम रामतीर्थ
जहाँ अहंकार मिटा है, वहाँ भीतर जगह खाली हुई, इधर स्पेस हुआ, वही ज्ञान उतर आता है, वही प्रभु उतर आता है।
-ओशो
क्षमा सज्जनों का विभूषण है।
-अज्ञात
हृदय को ज्ञानरूपी तेलसे भिगोए बिना आत्म-रूपी ज्योति का प्रकाश बाहर भली-भांति प्रकट नहीं हो सकता।
-स्वामी रामतीर्थ
हिंसा से समस्याओं का हल नहीं होता।
-जवाहर लाल नहेरू
मनुष्य को छोड़कर अन्य प्राणी हंसना नहीं जानते।
-चार्वाक
स्वर्ग और पृथ्वी सब हमारे अंदर है, पर अपने अंर के स्वर्ग से बिल्कुल अपरिचित है।
-महात्मा गांधी
जहाँ स्त्री की पूजा होती है, वहाँ देवता निवास करते हैं।
-सुषाषित
वह ज्ञान सच्चा ज्ञान है जिससे मन और हृदय पवित्र हो, सब ज्ञान का विपर्यास है।
-स्वामी रामकृष्ण परमहंस
त्रिपुंड धारण कोई साधु नहीं बन जाता है। कर्म साधू को साधू बनता है।
-ऋषि आंगिरस
जा हिंसा में विश्वास रखते है, वह मानवता के दुश्मन है
-बुद्ध
हंसी मन की गांठे बड़ी आसानी से खोल देती है, मेरे मन की ही नहीं, तुम्हारे मन की भी।
-महात्मा गांधी
यहा जीवन क्षणभंगुर है। इससे मोह कैसा अर्जुन।
-श्रीकृष्ण
एक क्षण का पाप कई साल का कष्ट बन जाता है।
-कालीदास

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