हृदय से मुस्कराना सीखें

एक बार किसी ने काका हाथरसी से पूछा कि व्यक्ति के जीवन में कौन-कौन से सुख होने चाहिए तो काका ने अपने चिरपरिचित अंदाज में इस प्रश्न का उत्तर कुछ यूँ दिया–
पहला सुख निरोगी काया, दूजा सुख पास हो माया,
तीजा सुख सुलक्षणा नारी, चौथा सुख हो उत्तराधिकारी,
सुख पाँचवा वो ही पाते, हंसते-हंसते उम्र बिताते।


हालांकि की उपरोक्त पद्यांश में चार सुख तो किसी कवि ने पहले ही गिना दिये थे, लेकिन काका जीने उन चारों सुखों में ‘हंसने’ के सुख को जोड़ उपरोक्त वर्णित सभी सुखों के बीच एक पाँचवें सुख का जो खालीपन था उसे पूरा किया। ये काका जी के शब्दों की बाजीगरी ही थी कि पद्यांश में पाँचवा सुख जोड़ने पर वह अपना मूल रूप नहीं खो पाया। काका जी ने पांचवें, सुख अर्थात ‘हंसने’ और ‘मुस्कराने’ को विशेष महत्व दिया है। आप सारी जिंदगी यदि मुस्कराते रहे तो आपका जीवन सफल है। रोते झिंकते जीवन बिताने से जीना भी कोई जीना है। प्रकृतिगत वास्तविकता है कि मनुष्य का जन्म रोते हुए होता है। उसके जीवन का अंत शांत एवं शिथिल के साथ होता है। संभवतः मनुष्य ही ऐसा प्राणी है जिसकी उत्पत्ति रोते हुए होती है। अगर थोड़ा दार्शनिक होते हुए इस रहस्य को जानने का प्रयास किया जाए, तो इसका अर्थ निकलेगा, जिस संसार में तूने जन्म लिया है, वहाँ रोना, झींकना, क्लेश, दुख और तनाव इत्यादि आते रहेंगे। मृत्यु के शांत एवं स्थिर हल्के मुस्कराहट भाव से अर्थ निकलता है, फिर भी आपको घबराना नहीं है आपको जीना है, सभी प्रकार के तनावों एवं क्लेश और दुखों के बीच आपको शांत एवं स्थिरता से मुस्काराते हुए इनका मुकाबला करना है। यहाँ आपकी मुस्कराहट ही आपका सबसे बड़ा हथियार बनेगी। जीवन और मृत्यु के इस रहस्य को जानकर ही आप अपने जीवन को सफल बना सकते है।
रोते हुए जन्म हुआ है तो क्या हुआ जीवन तो हंसते हुए बिताना चाहिए। फिल्म मुकद्दर का सिकंदर के एक गीत की कुछ पंक्तिया हैदृ
”रोते हुए आते हैं सब, 
हंसता हुआ जो जाएगा,
वो मुकद्दर का सिकंदर,
जाने मन कहलेगा।“
जिसने हंसते हुए जिंदगी जी वह सही अर्थों में भाग्य का धनी है। इसी प्रकार एक अन्य फिल्मी गीत की पंक्तियाँ हैंदृ
‘हंसते गाते जहां से निकल,
दुनिया की तू परवाह न कर।’
हंसना और मुस्कराना हमारे जीवन का अहम पहलू है। जिस दिन आपने हृदय से हंसना सीख लिया उसी दिन आपने सफल बनने की कला सीख ली। मुस्कान (Smile) हमें बजार से खरीदनी नहीं पड़ती। जब इसका मोल ही नहीं तो फिर कैसी कंजूसी। हृदय से हंसे-मुस्कराएं न केवल शारीरिक रूप से अपितु मानसिक रूप से भी आप स्वस्थ्य बनेंगे। शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ्य रहने पर ही आप अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं, थके हुए नीरस शरीर के साथ नहीं।
मुस्कान (Smile) का विस्तारि रूप निम्न प्रकार है
S – Set you Free
M– Make you special
I – Increase you Face Value
L – Lift up your Sprite.
E – Erase all you tension
मुस्कान (Smile) का विस्तारित रूप मुस्कान के महत्व को रेखांकित करता है। मुस्कान (Smile) के इस विस्तारित रूप के अनुसार एक बार मुस्कराने से स्वयं को स्वतंत्र बनाते हैं। अपने को विशेष बनाते है। इससे आपका महत्व बढ़ता है। इससे आपकी भावनाएँ उच्चतम स्तर पर पहुँचती हैं। अंत में मुस्कराने से आपका तनाव दूर होता है। मुस्कराने से वर्णित सभी लाभ आपको प्राप्त होंगे। आपको निर्धारित लक्ष्य तक ले जाने में सहायक बनेंगे। इसलिए सदैव मुस्कराते रहो। 
यदि आप अपनी दुकान चलाते हैं तो आपका मुस्कराता चेहरा आपके ग्राहकों पर जादूका-सा असर डालेगा। यह सहज की ग्राहकों को आपकी ओर आकर्षित करेगा। कुछ ग्राहक कुछ भी लेने में रुचि न दिखाएं तो भी आपके चेहरे पर आने वाली हल्की-सी मुस्कान उन्हें पुनः आने का आमंत्रण देगी और वह फिर कभी आपकी दुकान पर अवश्य ही आएगा। आपकी मधु-मुस्कान ग्राहक को आपकी दुकान से कुछ न कुछ खरीदने लेने के प्रेरित करती है। यदि सफल दुकानदार बनना चाहते हैं तो आपको हृदय से मुस्कारना होगा। झूठी और फीकी हंसी कभी भी मुस्कान नहीं बन सकती। वह एक प्रकार की खिसियाहट या झेंप बनती है। खिसियाट और झेंप आपको सफलता नहीं दिला सकती। मुस्कराइए मगर दिल से। वास्तविक हंसी-हंसे कृत्रिम या बनावटी हंसी न हंसे। कृत्रिमता या बनावटीपन कभी भी वास्तविकता के समीप नहीं हो सकते। वास्तविकता में सादगी और सहजता होती है, बनावटीपन में छल और प्रपंच। इसलिए सदैव वास्तविक हंसी हंसे।
नौकरी पेशा होने पर आप मुस्कान से ही उन्नति प्राप्त कर सकते हैं। आप अपने सहकर्मियों एवं वरिष्ठ के समक्ष कार्य के दौरान सदैव अपने चेहरे पर हल्की-सी मुस्कराहट लाएं। फिर देखें आपके समक्ष उपस्थिति व्यक्ति पर इसका का क्या प्रभाव पड़ता है। फिर वह चाहे आपके सहकर्मी हों या वरिष्ठ सभी आपसे प्रभावित होंगे। उनके और आपके बीच स्नेह एवं लगाव पनपेगा जो आपको उन्नति दिलाने में सहायक बनेगा।
सफल दाम्पत्य जीवन के लिए भी यदि पति-पत्नि अपनी समस्याओं के बीच एक दूसरे के समक्ष सदैव हल्की सी मुस्कराहट बिखेरते रहें तो दाम्पत्य जीवन में तनाव एवं कलह उत्पन्न ही नहीं हो सकते। पति के झल्लाने पर पत्नी प्यार से हल्के से मुस्काहट के साथ उसका प्रतित्युत्तर दे तो पति की झल्लाहट मिनट में छू मंतर हो जाएगी। तनाव एवं कलह तभी उत्पन्न होते हैं, जब झल्लाहट या क्रोध का प्रत्युत्तर झल्लाहट या क्रोध के साथ ही दिया जाता है। अगर कोई इस छोटी-सी बात को पल्लू में बांध लें तो पारिवारिक कलह खत्म हो जाय। दम्पत्ति हंसते-हंसते सफल दाम्पत्य जीवन बिताएं। बस आवश्यकता है, मुस्कराने की।
मुस्कान से आप न केवल स्वयं को आनंदित करते है अपितु आस-पास का माहौल भी आनंदित होता है। इससे कार्य-स्थल पर तनाव समाप्त हो जाता है। न केवल आपकी अपितु आपके सहकर्मियों की भी कार्यक्षमता बढ़ती है। मुस्कान एक औषधि है जो आपके साथ अन्य लोगों को भी खुशहाल बनाती है।
यह एक विडंबना ही है कि वर्तमान युग में मनुष्य को सब तरह साधन सुलभ हो गए है बावजूद इसके उसके पास हंसने एवं मुस्कराने के लिए फुर्सत नहीं है। न जाने क्यों लोग इतने नीरस होते जा रहे है। यदि जीवन में स्फूर्ति लाना चाहते हो, तो हृदय से हंसना-मुस्कराना सीखो तो जीवन स्वयं की सफल हो जाएगा।
मुस्कान से आप आनंदित होते हो। आनंदित और खुश व्यक्ति ही जीवन में सफल हो सकता है। मनुष्य की सफलता में उसके शारीरिक गतिविधियों की अपेक्षा उसके मस्तिष्क का सर्वाधिक योगदान होता हैं आपका मस्तिष्क स्थिर है तो आप लक्ष्य के प्रति समर्पित होंगें। आपका मस्तिष्क आपके शरीर को सफलता की दिशा में प्रयास करने के लिए संदेश देगा। आपका शरीर उसमें कार्य करेगा। कहने का तात्पर्य हैं कि आपकी बुद्धि आपके तन की स्वामी है। बुद्धि को स्थिर करके तनाव मुक्त करना होगा। तनाव मुक्ति के लिए मुस्कराना होगा। आप जितना हृदय से मुस्कराएंगे उतना ही आप तनावमुक्त होंगे। स्थिर बुद्धि ही लक्ष्य की ओर प्रेरित करेगी। इस दृष्टि से सफलता और मुस्कान के बीच गहरा रिश्ता है। तो आज से ही हंसते मुस्कारते हुए जीवन जीना प्रारंभ करो। चिंता छोड़ो तनाव छोड़़ो और मुस्कुराकर जीवन जीना सीखो। किसी शायर ने  कहा है, ‘जिंदगी जिंदादिली का नाम है, मुर्दा दिल क्या खाक जिया करते हैं।’ जिंदगी को जिंदादिली के साथ मुस्कुराकर जीयो। मुस्कराने पर ही सफलता मिलेगी।

Comments

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  2. दक्षिण समाचार एक साप्ताहिक पत्रिका जिसने कवियों को बढ़ावा दिया आजकल हम हर सप्ताह 20- 25 कविताएं हमारे पत्रिका में प्रकाशित कर रहे है
    इस सप्ताह के कविताएं पढ़ने के पिये नीचे का लिंक दबाये
    https://editorneerajkumar.blogspot.com/p/7-6-17.html

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